जानिए क्या है लोकसभा और राज्यसभा, इनके काम और अंतर

1945
लोकसभा और राज्यसभा में अंतर

भारत एक लोकतांत्रिक देश है। यहां के संसदीय प्रणाली में संसद राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा का सामूहिक रुप है। राष्ट्रपति संसद का प्रमुख होता है। वहीं संसद को दो सदनों में विभाजित किया गया है- लोकसभा और राज्यसभा। जहां लोकसभा को संसद को पहला और निम्न सदन भी कहा जाता है, वहीं राज्यसभा को द्वितीय सदन और उच्च सदन के नाम से भी जाना जाता है।

लोकसभा और राज्यसभा के कार्यों, सदस्यों के निर्वाचन और कार्यकाल को बेहतर ढंग से समझने के लिए पहले दोनों में अंतर को जानना होगा। तो आइए जानते हैं कि क्या है लोकसभा और राज्यसभा में अंतर।

लोकसभा और राज्यसभा में अंतर

                लोकसभा            राज्यसभा
· निर्वाचन
लोकसभा के सदस्यों का निर्वाचन आमचुनाव में हुए मतदान के जरिए होता है। राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन अप्रत्यक्ष निर्वाचन पद्धति द्वारा किया जाता है।  राज्यों और केंद्र शासित राज्यों के प्रतिनिधियों द्वारा
·  प्रतिनिधित्व
लोकसभा देश की समस्त जनता का प्रतिनिधित्व करती है। राज्यसभा राज्यों और केंद्रशासित क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती है।
·  सदस्यों की संख्या
लोकसभा में सदस्यों की अधिकतम संख्या 552 है। लेकिन फिलहाल लोकसभा में 545 सदस्य मौजूद हैं। राज्यसभा में सदस्यों की संख्या अधिकतम 250 है। इनमें राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत 12 सदस्य तथा 238 राज्यों और संघ-राज्य क्षेत्रों द्वारा चुने सदस्य होते हैं। फिलहाल राज्यसभा में 245 सदस्य हैं।
·  कार्यकाल
लोकसभा का कार्यकाल 5 वर्षों के लिए होता है। राज्यसभा एक स्थायी सदन है। ये कभी भंग नहीं होता। इसका कार्यकाल 6 वर्षों का होता है। राज्यसभा के करीब एक तिहाई सदस्य हर दो साल में रिटायर हो जाते हैं।
·  सदन प्रमुख
लोकसभा का सदन प्रमुख अध्यक्ष और उपाध्यक्ष होता है। ये दोनों ही लोकसभा के सदस्यों में से ही चुने जाते हैं। राज्यसभा के सदन प्रमुख को सभापति और उप- सभापति कहा जाता है। इस सदन के सभापति देश के उप- राष्ट्रपति होते हैं।
·  उम्र सीमा
लोकसभा में सदस्यों के निर्वाचित होने की न्यूनतम सीमा 25 साल है। राज्यसभा के सदस्यों के निर्वाचन की न्यूनतम सीमा 30 साल है।
·   वित्त विधेयक
वित्तीय विधेयक केवल लोकसभा में पेश किया जा सकता है। लोकसभा में इसे स्वीकृति मिलने के बाद राज्यसभा भेजा जाता है। वित्तीय विधेयक राज्यसभा में लोकसभा की स्वीकृति मिलने के बाद भेजा जाता है।
·   राष्ट्रपति द्वारा मनोनित सदस्य
लोकसभा में राष्ट्रपति द्वारा मनोनित सदस्यों की संख्या 2  (एंग्लो इंडियन) होती है। राज्यसभा में राष्ट्रपति द्वारा मनोनित सदस्यों की संख्या 12 होती है। ये सदस्य कला, शिक्षा, समाजसेवा एवं खेल जैसे क्षेत्रों से आते हैं।

 

लोकसभा और राज्यसभा से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

  • संसद की दो ईकाईयां लोकसभा और राज्यसभा का काम विधान यानी कि बिल पारित करना है। किसी भी विधेयक के पारित होने से पहले उसे दोनों सदनों में पेश किया जाता है। यहां से विधेयक पारित होने के बाद उस पर राष्ट्रपति की मुहर लगती है। उसके बाद ही देश में कोई भी नया कानून पारित किया जाता है।
  • पहली लोकसभा का गठन 17 अप्रैल 1952 को किया गया था। जिसके बाद इसकी पहली बैठक इसी साल 13 मई को हुई थी।

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