क्या हैं Flexible Fuel Vehicles (FFVs) और कैसे करते हैं ये काम?

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वाहनों की वजह से देश में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता ही जा रहा है। इसने आमजनों के साथ सरकार की चिंता भी बढ़ा दी है। ऐसे में प्रदूषण से निबटने के लिए सरकार की तरफ से कई तरह के कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में फ्लैक्सिबल फ्यूल व्हीकल के प्रयोग को भी प्रोत्साहित करने के लिए सरकार जल्द नियम बना सकती है। इसके जरिए वाहनों में जैव ईंधन का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। अब सवाल यह उठता है कि What are Flexible fuel vehicles (FFVs)? इस लेख में हम आपको इसी के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। साथ ही हम आपको इससे मिलने वाले लाभ एवं इसके नुकसान से भी अवगत करा रहे हैं।

इस लेख में आप पढ़ेंगे:

  • FFVs की पृष्ठभूमि
  • What are FFVs?
  • कैसे काम करते हैं Flexible fuel vehicles?
  • Flexible fuel vehicles से मिलने वाले लाभ
  • FFVs से होने वाले नुकसान

FFVs की पृष्ठभूमि

वाहनों के एक संशोधित संस्करण के रूप में फ्लैक्सिबल फ्यूल व्हीकल को परिभाषित किया जा सकता है। वास्तव में यह dual-fuel vehicle होता है, जिसमें कि पेट्रोल और इथेनॉल इन दोनों को एक साथ उपयोग में लाए जाने की सुविधा उपलब्ध होती है। इसकी खासियत यह है कि न केवल इसकी कीमत कम होती है, बल्कि इससे सुविधा भी बहुत होती है। इसके आधार पर लोग आराम से पेट्रोल और इथेनॉल में अपने वाहनों को परिवर्तित कर सकते हैं। वर्तमान समय की बात की जाए तो ब्राजील में इसका उपयोग बड़े पैमाने पर हो रहा है और वहां यह प्रयोग सफल भी हुआ है।

ब्राजील में आज की तारीख में जितने भी वाहन बेचे जा रहे हैं, उनमें से अधिकांश वाहन फ्लैक्सिबल फ्यूल व्हीकल्स ही हैं। इस वक्त जो नियम बने हुए हैं, उसके मुताबिक 10 प्रतिशत तक इथेनॉल पेट्रोल में मिलाए जा सकते हैं। हालांकि, इसकी आपूर्ति इतनी ज्यादा नहीं है। इतना ही नहीं, कई अन्य प्रकार की परिवहन चुनौतियां भी मौजूद हैं। ऐसे में केवल 15 राज्य ही अपने देश में ऐसे हैं, जहां 10 फीसदी मिश्रित पेट्रोल की उपलब्धता हो पा रही है। वहीं, बाकी राज्यों में मुश्किल से 0 से 5 प्रतिशत ही यह उपलब्ध हो पाता है।

What are FFVs?

फ्लैक्सिबल फ्यूल व्हीकल्स दरअसल वे कार, एक्सयूवी या फिर ट्रक हैं, जिनमें यह सुविधा होती है कि इन्हें गैसोलीन पर या फिर गैसोलीन और इथेनॉल के मिश्रित इंधन के साथ चलाया जा सके, जिसमें 85 प्रतिशत तक इथेनॉल हो सकता है। सामान्य गैसोलीन इथेनॉल मिश्रण की बात करें, तो इनमें E85, E15 और E10 मौजूद होते हैं, जिनमें कि E के बाद मौजूद नंबर इंधन में मौजूद इथेनॉल के सर्वाधिक प्रतिशत को इंगित करते हैं।

नियमित गैसोलीन से यदि इथेनॉल की तुलना की जाए तो यह भले ही कम ऊर्जा प्रदान करती है, लेकिन आमतौर पर इसके इस्तेमाल की वजह से वाहनों के प्रदर्शन पर ज्यादा असर नहीं पड़ता है। यदि E85 को इस्तेमाल में लाया जाता है, तो 15 से 27 प्रतिशत तक इंधन की क्षमता में कमी आती है। अमेरिका के ऊर्जा विभाग की बात करें, तो इसने फ्लैक्सिबल फ्यूल को गैसोलीन इथेनॉल के मिश्रण के रूप में परिभाषित किया है, जिसमें कि 51 से 83 प्रतिशत तक इथेनॉल मौजूद होता है।

कैसे काम करते हैं Flexible fuel vehicles?

What are Flexible fuel vehicles (FFVs), यह तो आप समझ ही गए हैं। अब आपको हम यह बताते हैं कि FFVs किस तरह से काम करते हैं। सबसे पहली बार FFV को बनाने का श्रेय हेनरी फोर्ड को जाता है। उन्होंने ऐसा उन्हें 1908 में किया था। तब उन्होंने T-Ford मॉडल तैयार किया था, जो कि या तो गैसोलीन पर या फिर इथेनॉल पर चलता था। इसके बाद भी लंबे अरसे तक इसमें धीरे-धीरे प्रगति होती रही। आखिरकार वर्ष 1994 में वह पहला मौका आया, जब बड़े पैमाने पर FFVs का निर्माण होने लगा और बाजार में इसने अपनी दस्तक दे दी। फोर्ड टोरस (Ford Taurus) को 1994 में ही जारी किया गया था। यह गैसोलीन या फिर इथेनॉल के साथ गैसोलीन के मिश्रण पर आराम से चल सकता था।

इथेनॉल फिर से प्रयोग में लाई जा सकने वाला अनाज वाला अल्कोहल होता है, जो कि मक्का या फिर गन्ना से निर्मित होता है। इसकी खासियत यह थी कि इसमें एक कंप्यूटर सिस्टम भी लगाया गया था, जो कि मिश्रित इंधन से कार क्षमता को काफी हद तक बढ़ा देता था। वर्तमान परिदृश्य में देखें तो बाजार में FFVs के लिए बहुत सारे विकल्प मौजूद हैं। रिन्यूएबल्स फ्यूल्स एसोसिएशन के मुताबिक वर्ष 2018 में संयुक्त राज्य अमेरिका में सड़क पर दौड़ने वाले FFVs की संख्या 2 करोड़ 40 लाख से भी अधिक थी।

चाहे एक्सेलरेशन की बात हो या फिर पेलोड की क्षमता की, चाहे इसकी ताकत की बात हो या फिर इसकी गति की, हर मामले में परंपरागत गैसोलीन की तरह ही कार या ट्रक आदि को चलाने में पूरी तरह से सक्षम साबित हो रहा है। इससे इनके प्रदर्शन पर किसी तरह का कोई असर ही नहीं पड़ रहा है। साथ ही जितने रखरखाव की जरूरत गैसोलीन से चलने वाले वाहनों को पड़ती है, उससे ज्यादा रखरखाव की आवश्यकता FFVs को बिल्कुल भी नहीं पड़ती।

देखने में भी ये बिल्कुल एक जैसे ही लगते हैं। थोड़े बहुत अंतर की यदि इन्हें पहचानने के लिए बात करें तो इसमें एक पीले रंग का गैस कैप लगा होता है। साथ ही इसमें इंधन भरने वाली जगह पर ‘E85’ का लेबल लगा हुआ रहता है। इसके अलावा वाहन पर E85 या फ्लेक्स-फ्यूल या FFV का बैच लगा हुआ दिखता है।

Flexible fuel vehicles से मिलने वाले लाभ

  1. FFVs आपको यह मौका देता है कि आप परंपरागत गैसोलीन और गैसोलीन-इथेनॉल मिश्रण दोनों में से एक का चुनाव कर सकते हैं। उदाहरण के लिए आपके इलाके में यदि E85 की कीमत गैसोलीन से कम है, तो आप पैसे बचा सकते हैं। जब मिश्रण उपलब्ध न हो, तब आप गैस भरवा सकते हैं।
  2. इथेनॉल की खासियत यह है कि यह एक नवीनीकरणीय ईंधन है, जो कि परंपरागत गैसोलीन की तुलना में ज्यादा साफ तरीके से जलता है। इससे यह ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन को भी कम करता है और आपके आसपास की हवा को भी साफ रखता है।
  3. E85 को इस्तेमाल में लाने का एक और फायदा यह भी है कि इससे विदेशों से आयात होने वाले ईंधन पर हमारी निर्भरता कम हो जाती है। स्थानीय किसान, जो कि मक्का और गन्ने से इथेनॉल का उत्पादन कर सकते हैं, उसे प्रयोग में लाकर हम अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने का काम कर सकते हैं।

FFVs से होने वाले नुकसान

  1. गैस की तुलना में इथेनॉल ईंधन से चलने वाले वाहनों को कम ऊर्जा मिलती है। कम दूरी की यात्रा करनी हो तो यह महंगा साबित होता है।
  2. E85 की उपलब्धता भी सीमित है, जिसकी वजह से थोड़ी परेशानी हो सकती है।

FFVs के फायदे और नुकसान की तुलना करने पर हम पाते हैं कि इसके फायदे इसके नुकसान से कहीं ज्यादा हैं। यही वजह है कि वर्तमान में इसकी मांग बढ़ती जा रही है और दुनियाभर की सरकारें भी इसे अपना रही हैं।

निष्कर्ष

दोस्तों इस लेख में आपको यह सवाल कि What are Flexible fuel vehicles (FFVs) का जवाब विस्तार से मिल गया है। न्यूज एजेंसी IANS के साथ बातचीत में पेट्रोलियम सचिव तरुण कुमार यह कह चुके हैं कि सरकार की तरफ से सक्रिय तौर पर Flexible fuel vehicles के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने के कदम उठाए जाने वाले हैं, ताकि वाहनों को चलाने के लिए जैव-ईंधन का अधिकाधिक प्रयोग हो सके। इसमें कोई शक नहीं कि हमारे पर्यावरण के लिए भी यह बहुत अच्छा साबित होने वाला है।

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