वित्तीय साक्षरता अभियान- भारत को डिजिटल बनाने की पहल

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वित्त को समझने की क्षमता को वित्तीय साक्षरता कहा जाता है। वित्तीय शिक्षा आज के युग में बहुत आवश्यक हो चुकी है। लोगों को वित्त की जानकारी होना अनिवार्य है ताकि वो सही फैसले ले सकें। वित्तीय शिक्षा का अर्थ होता है धन के बारे में सही जानकारी रखना जिससे आप अपने धन का बेहतर प्रबंधन करने के साथ-साथ अपने भविष्य वित्तीय को भी बेहतर बना सकें।

वित्तीय साक्षरता अभियान की शुरुआत 1 दिसम्बर 2016 को की गयी है। हमारे देश के मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय ने इस अभियान की शुरुआत भारत में डिजिटल लेन-देन की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए और लोगों को इसके प्रति जागरूक करने के लिए किया है। 500 और 1000 के नोट बंद हो जाने के बाद से देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने और कैश-लेस इकॉनमी को प्रोत्साहित करने के हेतु इस अभियान को चालू किया गया।

भारत एक ऐसा देश है जहाँ ज़्यादातर काम नकद में होते हैं। बहुत से लोगों को कैश-लेस सुविधाओं और अर्थव्यवस्था की जानकारी तक नहीं है। वित्तीय साक्षरता अभियान लोगों को जागरूक करने के लिए ही शुरू हुआ है।

देश के मानव संसाधन मिनिस्टर ने विडियो कांफ्रेंस द्वारा देश के तमाम शिक्षा संस्थानों जैसे IIT, IIM, NIT आदि से देश की उन्नति में साथ देने की प्रार्थना की। इस अभियान के अन्तर्गत सबसे पहले आज के नौजवानों से अपने आस पास के लोगों को डिजिटल तरीकों से साक्षर करने का अनुरोध किया गया। किसी भी नयी चीज़ को विद्यार्थी बहुत जल्दी सीखते हैं। इसी कारण देश के मानव संसाधन मिनिस्टर ने सभी शिक्षा संस्थानों को कोई भी लेन-देन डिजिटल तरीके से करने का अनुरोध किया। सरकार चाहती है कि लोग डिजिटल तरीकों का पूरा उपयोग करें और उसका लाभ उठायें।

भारत में कई छोटे दुकानदार और व्यापारी भी डिजिटल तरीकों से अवगत नहीं हैं। इस अभियान द्वारा उनको भी डिजिटल तरीके से जोड़ने की सरकार की ओर से एक पहल की गयी है। आप और हम मिल कर अपने देश को प्रगति के मार्ग पर ले जा सकते हैं और अपने देश को डिजिटल इंडिया बना सकते हैं।

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