NanoSniffer क्या है?

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what is nanosniffer

दोस्तों अक्सर आपने देखा होगा देश दुनिया में आतंकवादी गतिविधियों के तहत अनेक बारूदी विस्फोटक हादसे हो जाते हैं , इन हादसों में कई जवान तथा आम नागरिक अपनी जिंदगी गवांं बैठते हैं। भारत में ऐसी घटनायें आतंक प्रभावित क्षेत्र कश्मीर तथा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में घटित होती रहती है। इन घटनाओं से बचाव के लिए सुरक्षा बलों द्वारा सर्च ऑपरेशन चलाये जाते हैं, जिसमे आधुनिक ETD उपकरणों और ‘SnifferDogs’ का इस्तेमाल किया जाता है। आज के इस लेख में हम ऐसे ही एक ETD उपकरण के बारे में चर्चा करने वाले हैं जो शुद्ध रूप से ‘स्वदेशी तकनीक’ से विकसित किया गया है। इस उपकरण के बारे में जानकारी 8 अप्रैल 2021 को देश के माननीय केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक” द्वारा साझा की गयी है। इस ETD उपकरण का नाम है ‘NanoSniffer’ तथा इसे भारत के प्रतिभावान IITian की टीम के द्वारा एक स्टार्टअप के तहत तैयार किया गया है। तो चलिए जानते हैं ‘NanoSniffer’ के बारे में विस्तार से।

इस लेख में आपके लिए है

  • NanoSniffer क्या है?
  • क्या होते हैं ETD या ‘एक्सप्लोसिव ट्रेस डिटेक्शन’ उपकरण ?
  • क्या खूबियां हैं हमारे ‘NanoSniffer’ में?.
  • जानिए कैसे NanoSniffer फायदेमंद है हमारे लिए?
  • ‘इनक्यूबेटेड स्टार्टअप’ किसे कहते है?.

NanoSniffer क्या है?

NanoSniffer एक छोटे आकार का दुनिया का पहला Microsensor आधारित ‘एक्सप्लोसिव ट्रेस डिटेक्शन’ ETD उपकरण है , जो Micro-Electromechanical System पर कार्य करता है। NanoSniffer को IIT बॉम्बे के इनक्यूबेटेड स्टार्टअप ‘NanoSniff Technologies’ द्वारा विकसित किया गया है। NanoSniffer की मार्केटिंग IIT दिल्ली के इनक्यूबेटेड स्टार्टअप ‘Vehant Technologies’ द्वारा की जा रही है।

क्या होते हैं ETD या ‘एक्सप्लोसिव ट्रेस डिटेक्शन’ उपकरण ?

• ‘एक्सप्लोसिव ट्रेस डिटेक्शन’ छोटे आकार के विस्फोटकों का पता लगाने के लिए उपयोग किये जाने वाले उपकरण होते हैं।

• ‘एक्सप्लोसिव ट्रेस डिटेक्शन’ की विशेषता होती हैं इसका छोटा आकार ,अति – संवेदनशीलता, और वजन में हल्का होना।

•आमतौर पर ETD का उपयोग नशीले पदार्थो की तस्करी को रोकने के लिए भी किया जाता है। एयरपोर्ट्स, हैरिटेज इमारतों, मेट्रो स्टेशन आदि में इसका उपयोग सुरक्षाबलों द्वारा किया जाता है।

• ETD की खोज का श्रेय डॉ स्टीफन ली को जाता है , उन्होंने गुप्त रूप से कार्यकारी एक ‘आर्मी रिसर्च लेबोरेटरी’ में इसको बनाया था।

• ETD जैविक उपकरण के तौर पर SnifferDogs का उपयोग प्रारम्भ से ही किया जा रहा है , ये SnifferDogs प्रशिक्षित होते है और विस्फोटकों के प्रति अतिसंवेदनशील होते हैं। प्रशिक्षित मधुमक्खियों का उपयोग भी इस कार्य के लिए किया जाता है।

• कई बार विस्फोटकों की खोज के दौरान हादसा हो जाता है , जिससे बचाव के लिए आधुनिक विस्फोटक खोजी यंत्रो का उपयोग किया जाने लगा है।

• वर्तमान में ETD उपकरणों में प्रयोग होने वाली अन्य तकनीकों में Colorimetrics, Ion mobility spectrometry, Thermo redox, Chemiluminescence, Amplifying fluorescent polymer, Mass spectrometry आदि प्रमुख हैं।

क्या खूबियां हैं ‘NanoSniffer’ में?

• NanoSniffer विश्व का पहला Microsensor आधारित विस्फोटक खोजी यंत्र है।

• NanoSniffer MEMS सिस्टम का उपयोग करता है। MEMS का अर्थ Micro-Electromechanical System है।

• NanoSniffer किसी प्रकार और क्लास के विस्फोटकों को 10 सेकेंड में ढूंढ निकलने की क्षमता रखता है।

• NanoSniffer पारम्परिक, मिलिटरी , स्वनिर्मित सभी प्रकार के विस्फोटकों को खोजने में सक्षम है।

• NanoSniffer किसी विस्फोटक की पहचान पर उसका ‘Visible ‘और ‘Audible’ दोनों प्रकार का अलार्म देने की ख़ूबी रखता है तथा ये sunlight color को भी आसानी से पढ़ सकता है।

• NanoSniffer विस्फोटकों की नैनो-ग्राम मात्रा का पता लगाने और सेकंड में परिणाम देने में सक्षम है।

• NanoSniffer की कीमत 10 लाख रुपये है, जो की अन्य पारम्परिक उपकरणों की तुलना में काफी कम है।

जानिए कैसे NanoSniffer फायदेमंद है हमारे लिए?

• NanoSniffer पूर्णतया भारतीय कांसेप्ट है ,इसका इनोवेशन, डिज़ाइन , रीसर्च और डेवलपमेंट भारत में हुआ है, इस प्रकार से हम कह सकते है की रक्षा उपकरणों में भारत की विदेशो पर निर्भरता को यह कम करने में सहायक होगा।

• NanoSniffer प्रोजेक्ट को भारत के होनहार IITn की टीम ने एक स्टार्टअप के तहत तैयार किया है, तो यह प्रोजेक्ट भारत में अन्य क्षेत्रों के इंस्टीटूट्स, रीसर्च विंग और स्टार्टअप्स को भी प्रोत्साहित करने का कार्य करेगा।

• NanoSniffer प्रोजेक्ट पूर्णतया स्वदेशी है, अतः यह टेक्नोलॉजी उपयोग करने में आसान तथा कम कीमत में उपलब्ध रहेगी। यह प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री के ” आत्मनिर्भर” मिशन को भी प्रासंगिक करता हैतथा ‘मेड इन इंडिया’ के तहत तैयार किया जायेगा।

• NanoSniffer प्रोजेक्ट विदेशो में भी “पेटेंट” करा लिया गया है। अतः इस कांसेप्ट की कॉपी तथा उपयोग भारत की परमिशन के बिना नहीं की जा सकती है।

• NanoSniffer यंत्र की मार्केटिंग का काम Vehant Technologies कंपनी देख रही है , यह एक ‘आर्टिफीसियल इंटेलिजेंट’, ‘मशीन लर्निंग’ तथा सर्विलांस आधारित कंपनी है , अतः यह एक प्रबल सम्भावना है की आने वाले समय में NanoSniffer का उपयोग AI /ML तथा सर्विलांस क्षेत्र में भी प्रमुखता से किया जाने लगेगा।

• दुनियाभर में ‘एक्सप्लोसिव ट्रेस डिटेक्टर कारोबार’ का मूल्य लगभग 10,000 करोड़ के आस-पास आंका गया है। भारत का इस उद्योग में योगदान केवल 2-3% है , ऐसे समय में यदि कम कीमत वाले NanoSniffer को वैश्विक बाज़ारो में उतारा जाये तो यह भारत के लिए एक फायदेमंद सौदा साबित हो सकता है।

‘इनक्यूबेटेड स्टार्टअप’ किसे कहते है?

• यदि किसी स्टार्टअप को किसी तकनीकी संस्थान द्वारा व्यापारिक एवं तकनीकी सुविधाओं, सलाह, प्रारंभिक विकास निधि नेटवर्क और सम्बन्ध सहकारी रिक्त स्थान, प्रयोगशाला की सुविधा, सलाह और सलाहकार समर्थन जैसी सुविधाएं प्रदान करता है , तब इस स्थिति में इस स्टार्टअप को ‘इनक्यूबेटेड स्टार्टअप’ तथा तकनीकी संस्थान को ‘इन्क्यूबेशन सेंटर’ कहा जायेगा।

• ‘NanoSniffer Technologies’ एक ‘इनक्यूबेटेड स्टार्टअप’ है जिसे IIT बॉम्बे द्वारा इनक्यूबेटेड किया गया है , इसी प्रकार से ‘Vehant Technologies’ भी एक ‘इनक्यूबेटेड स्टार्टअप’ है जिसका ‘इन्क्यूबेशन सेंटर’ IIT दिल्ली है।

• देश में 56 ‘इन्क्यूबेशन सेंटर’ को मान्यता प्रदान की गई है. ये इन्क्यूबेटर्स स्टार्टअप्स का मूल्यांकन कर स्टार्टअप इंडिया स्कीम के तहत लाभ प्रदान करने के लिए, इनके नाम सरकार को सुझाते हैं।

• देश में लगभग 250 मान्यता प्राप्त इनक्यूबेटर स्टार्टअप हैं और उनमें से कई को आईआईएम (IIM), आईआईटी (IIT) और केरल स्टार्टअप मिशन जैसी विशेष स्टार्टअप एजेंसियों तथा सम्मानित शैक्षणिक संस्थानों द्वारा पोषित किया गया है।

• 2020 में देश में 396 शोध पत्र प्रकाशित हुए हैं, आइआइटी इंदौर के प्रोफेसर डॉ. गौरीनाथ बांदा को पिछले साल ‘सिस्टम एंड मेथड फॉर इलेक्ट्रिकल एनर्जी कंजर्वेशन” शीर्षक के लिए एक पेटेंट दिया गया है।

चलते चलते

वर्तमान में देश में 300 शोध पत्रों में से केवल एक को पेटेंट प्राप्त होता है, इसकी तुलना में अमेरिका में, पांच शोध पत्रों में से एक का पेटेंट कराया जाता है। हमे जरूरत है देश में अधिक से अधिक टेक्नोलॉजी आधारित स्टार्टअप और आइडियाज को सुविधा एवं वित्तपोषित करने की जिससे की देश में प्रत्येक क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में नये स्टार्टअप सामने आये तथा हम ‘रीसर्च और डेवलपमेंट’ में जल्द से जल्द आत्मनिर्भर बन सके। दोस्तों इस लेख में हमने ‘NanoSniffer’ से जुडी हर जरुरी जानकारी आप तक पहुंचाने का प्रयास किया है, हम आशा करते हैं आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा,धन्यवाद्।

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