Private Sector Banks vs Public Sector Banks: अंतर बहुत हैं

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Public banks vs private banks

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सरकारी और निजी बैंकों के बीच का अंतर काफी होता है, जिसके बारे में हम आपको यहां बता रहे हैं। भर्ती की प्रक्रिया से लेकर वेतनमान आदि तक में दोनों में बहुत अंतर होता है। Private sector banks vs Public sector banks पर जब हम विचार करते हैं तो हम यह पाते हैं कि इन दोनों ही क्षेत्रों के बैंकों के बीच बहुत से अंतर होते हैं। बैंक में नौकरी करने के लिए युवाओं की लाइन लगी रहती है, लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र यानी कि पब्लिक सेक्टर बैंक में काम करने को युवा निजी क्षेत्र के बैंक यानी कि प्राइवेट सेक्टर के बैंक से ज्यादा तवज्जो देते हैं। फिर भी बहुत से युवाओं के दिमाग में यह कन्फ्यूजन बना रहता है कि आखिर पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर बैंक के बीच क्या अंतर है और दोनों में से किसमें कॅरियर बनाना उनके लिए बेहतर साबित होगा।

इसमें कोई शक नहीं कि जब देश की अर्थव्यवस्था में योगदान की बात आती है, तो सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र दोनों के ही बैंक इसमें उल्लेखनीय भूमिका निभाते हैं। फिर भी जब दोनों के काम करने के तरीकों की बात आती है, तो इनके बीच काफी अंतर देखने के लिए मिल जाते हैं।

सरकारी और निजी बैंकों के बीच का अंतर

सरकारी और निजी बैंकों के बीच जो प्रमुख अंतर हैं, वे निम्नवत हैं:

  1. कॅरियर में प्रगति को लेकर

बैंकिंग सेक्टर में जो लोग काम कर रहे होते हैं, उनका यह सपना होता है कि अपने इस कॅरियर में वे ज्यादा से ज्यादा उपलब्धियां हासिल करें और बहुत आगे तक जाएं। हालांकि, जब उम्मीदवार बैंकिंग सेक्टर में काम करने के लिए तैयारी कर रहे हैं, तो उन्हें पहले से अपने दिमाग में यह स्पष्ट कर लेना चाहिए कि उन्हें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक में काम करना है या फिर निजी क्षेत्र के बैंक में। दोनों ही तरह के बैंकों में कॅरियर के विकास के अवसर भी अलग-अलग तरह के होते हैं।

यदि हम सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बात करें तो यहां पर कॅरियर के विकास की जो गति है, वह बहुत ही धीमी होती है। कर्मचारियों को पहले से ही यह पता होता है कि उन्हें प्रोमोशन कुछ निश्चित वर्षों के बाद ही मिलेगा। ऐसे में उनका जोश और उनका उत्साह काफी हद तक प्रभावित हो जाता है। सार्वजनिक बैंकों में प्रोमोशन को लेकर पॉलिसी बनी हुई है और इसकी वजह से कर्मचारियों के कॅरियर के विकास में कई बार बाधा भी आती है। हालांकि, जैसे-जैसे प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे सार्वजनिक क्षेत्र के भी कई बैंकों ने अब अपने प्रतिभाशाली कर्मचारियों को उनकी योग्यता के आधार पर प्रोमोशन देना शुरू कर दिया है, ताकि वे उनके साथ बने रहकर आगे भी काम करते रहें।

वहीं, जब हम निजी क्षेत्र के बैंकों पर नजर डालते हैं, तो यहां कर्मचारियों को प्रोमोशन उनकी योग्यता के आधार पर दिया जाता है। यहां कर्मचारियों को हमेशा ऐसे अवसर मिलते रहते हैं, जिनसे कि वे अपने कॅरियर में प्रगति कर सकें। निजी क्षेत्र के बैंकों की यह खासियत होती है कि यहां प्रतिभाओं को पहचाना जाता है और उन्हें पुरस्कृत करते हुए प्रोत्साहित भी किया जाता है।

  1. भर्ती की प्रक्रिया में अंतर

बैंकों में जब भर्ती की प्रक्रिया की बात आती है, तो सार्वजनिक और निजी बैंकों में इस मामले में बड़ा अंतर देखने के लिए मिलता है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में जब नियुक्ति होती है, तो इसके लिए उन दिशा-निर्देशों का पालन किया जाता है, जो कि सरकार की तरफ से पहले से ही तय किए जा चुके हैं। इसके लिए समाचार पत्रों के साथ इंटरनेट पर भी विज्ञापन दिए जाते हैं। आवेदन मंगवाए जाते हैं। उम्मीदवारों के लिए लिखित परीक्षा से लेकर कंप्यूटर टेस्ट और इंटरव्यू के साथ ग्रुप डिस्कशन आदि का भी आयोजन किया जाता है। इन सभी के बाद ही सार्वजनिक बैंकों में कर्मचारियों की भर्ती हो पाती है। साथ ही सार्वजनिक बैंकों में भर्ती के ज्यादा अवसर भी उपलब्ध होते हैं। इसके अलावा सार्वजनिक बैंकों में नियुक्ति के दौरान सरकारी कोटा प्रणाली से जुड़े नियमों का भी पालन किया जाता है।

वहीं दूसरी ओर जब हम निजी बैंकों में भर्ती की प्रक्रिया को देखते हैं, तो हम यह पाते हैं कि यहां पर वॉक-इन-इंटरव्यू, रेफरल और केंपस रिक्रूटमेंट आदि के आधार पर भर्ती ले ली जाती है। वैसे, जिस तरह से बैंकिंग सेक्टर में बदलाव देखने को मिले हैं, उसका अनुसरण करते हुए अब निजी क्षेत्र के भी कई बैंकों ने भर्ती के लिए विज्ञापन देना और प्रतियोगी परीक्षा के जरिए नियुक्ति करना शुरू कर दिया है। हालांकि, सरकार की तरफ से बनाए गए कोटा संबंधी नियमों का पालन निजी बैंकों द्वारा भर्ती प्रक्रिया के दौरान नहीं किया जाता है।

  1. सुरक्षा के संदर्भ में

सार्वजनिक बैंकों में काम करने वाले कर्मचारी अपनी नौकरी को अधिक सुरक्षित पाते हैं, क्योंकि यहां उन्हें न केवल अपनी जिम्मेदारियों को समझने के लिए पर्याप्त समय मिलता है, बल्कि गलतियों को सुधारने का भी उन्हें वक्त मिल जाता है। सार्वजनिक बैंकों में किसी भी कर्मचारी को तभी बाहर किया जाता है, जबकि उसने बहुत बड़ी गलती की हो।

वहीं, निजी बैंकों में बाजार की प्रतिस्पर्धा की वजह से गलती करने पर कर्मचारियों के नौकरी गंवाने की आशंका हमेशा बनी रहती है। इस वजह से वे बेहद दबाव में काम करते हैं।

  1. वेतनमान भी अलग अलग

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए वेतनमान को लेकर पहले से ही सरकार की तरफ से पॉलिसी बनी हुई है और इसी के आधार पर अलग-अलग पदों पर भर्ती किए जाने वाले कर्मचारियों को उनके वेतनमान के मुताबिक वेतन प्राप्त होता है।

वहीं दूसरी ओर जब हम निजी बैंकों में वेतनमान को देखते हैं, तो वहां पर इसके लिए किसी निश्चित नियम का पालन नहीं किया जाता है। यहां पर कर्मचारियों को वेतन उनकी योग्यता के साथ उनके अनुभव के आधार पर दिया जाता है। निजी क्षेत्र के बैंकों में माना जाता है कि ऐसे लोगों को वरीयता दी जाती है, जिनके पास एमबीए की डिग्री हो। हालांकि, यह कोई अनिवार्य योग्यता नहीं है।

  1. स्थानांतरण की प्रक्रिया

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में काम कर रहे कर्मचारियों को मानसिक रूप से कहीं पर भी स्थानांतरण पाने के लिए तैयार रहना पड़ता है। जरूरत के मुताबिक सार्वजनिक बैंक अपने कर्मचारियों को कहीं भी ट्रांसफर कर देते हैं।

वहीं दूसरी ओर निजी क्षेत्र के बैंकों में यह देखा जाता है कि कई बार कर्मचारी हमेशा एक ही जगह पर काम करते रह जाते हैं। यहां ट्रांसफर जैसे कोई समस्या नहीं होती है।

  1. मिलने वाली सुविधाएं

Private vs Public Sector Banks की बात करते वक्त सुविधाओं के बारे में बताना भी जरूरी है। सार्वजनिक बैंकों में काम करने वाले कर्मचारियों को बहुत ही कम ब्याज दर पर ऋण और पेंशन योजना जैसी सुविधाएं मिल जाती हैं।

वहीं, निजी बैंक इस तरह की कोई सुविधा तो नहीं देते हैं, लेकिन कई निजी बैंक समय-समय पर अपने प्रतिभाशाली कर्मचारियों को पुरस्कार देकर उनका उत्साह बढ़ाते रहते हैं।

  1. काम करने का माहौल

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कर्मचारी बिना किसी टेंशन के काम करते हैं, क्योंकि यहां ज्यादा प्रतिस्पर्धा नहीं होती है।

वहीं, निजी क्षेत्र के बैंकों में काम करने वाले कर्मचारियों को दिए गए टारगेट को पूरा करना होता है, जिसके लिए उन्हें बेहद दबाव में काम करना पड़ता है।

  1. प्रशिक्षण में अंतर

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अपने कर्मचारियों को इस तरह से प्रशिक्षण दिया जाता है कि लंबे समय तक वे आसानी से काम कर सकें।

वहीं, निजी क्षेत्र के बैंकों में ऑन जॉब ट्रेनिंग प्रदान की जाती है, ताकि प्रतिस्पर्धा के मुताबिक कर्मचारी काम करना सीख सकें। निजी बैंक अच्छा प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को ट्रेनिंग के लिए बाहर भी भेजते हैं।

चलते-चलते

सरकारी और निजी बैंकों के बीच का अंतर दोस्तों अब आपको पता चल चुका है। इसके आधार पर आप यह निर्णय ले सकते हैं कि बैंकिंग क्षेत्र में अपना कॅरियर बनाने के लिए आपके लिए सार्वजनिक बैंक अच्छे होंगे या फिर निजी बैंक। साथ ही आप अपने उन दोस्तों का भी इसे लेकर मार्गदर्शन कर सकते हैं, जो कि बैंकिंग सेक्टर में कॅरियर बनाने को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं।

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