India-China five-point Action Plan: महत्व और प्रासंगिकता

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India-China Relations

India-China Disputes पिछले काफी समय से बड़ी सुर्खियां बटोर रहा है। भारत और चीन के बीच स्थित वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव लगातार बना हुआ है। हाल ही में 10 सितंबर को भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने साथ में एक महत्वपूर्ण बैठक की है।

दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच इस बैठक के पूरा होने के बाद थोड़ी उम्मीद की किरण निकली है कि इस विवाद का हल बातचीत के जरिए हो सकता है। इसकी वजह दोनों विदेश मंत्रियों के बीच 5 बिंदुओं पर बनी सहमति है, जो दोनों देशों के दरम्यान कायम तनाव को कम करने के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है। संभव है कि इन बिंदुओं पर बनी सहमति के बाद LAC पर एक बार फिर से शांति कायम हो जाए।

India-China five-point Action Plan

India-China Relations को एक बार फिर से पटरी पर लाने के लिए 5 बिंदुओं पर सहमति तो दोनों देशों के बीच जरूर बनी है, लेकिन चीन के विदेश मंत्री वांग यी से भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साफ-साफ कह दिया है कि सीमा समझौते का पूरी तरीके से पालन होना जरूरी है। दोनों देशों के बीच जिन पांच बिंदुओं पर सहमति बनी है, वे निम्नवत हैं:

बातचीत चलती रहे और सेना पीछे हट जाए

India-China Disputes बीते 5 मई से ही लगातार कायम है। भारतीय इलाकों में चीन की सेना ने तब घुसपैठ करने का प्रयास किया था, लेकिन भारत के बहादुर जवानों ने उनकी नापाक कोशिशों की हवा निकाल कर रख दी थी। ऐसे में मॉस्को में दोनों देशों के नेताओं के बीच हुई बैठक में इस बात पर सहमति बनी है कि बातचीत दोनों देशों के बीच चलती रहेगी, मगर दोनों ही देशों की सेना तत्काल पीछे हट जाएगी, ताकि तनाव को कम हो सके।

विवाद में न बदल जाएं मतभेद

India-China Relations को एक और मौका देने के लिए दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच इस बात को लेकर सहमति बनी है कि मतभेदों को विवादों में वे सर्वसम्मति से नहीं बदलने देंगे। इसके लिए मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए दोनों सहमत हुए हैं। इसे लेकर सहमति बनी है कि जो भी फैसला सीमा को लेकर किया गया है, उसका पूरी तरीके से पालन सुनिश्चित हो और विवाद यदि ज्यादा गहरा जाए तो दोनों देशों के नेताओं के बीच बातचीत करके इसका समाधान निकाला जाए।

समझौते का दोनों ही देश करेंगे सम्मान

India-China Disputes को सुलझाने की दिशा में जिन पांच बिंदुओं पर भारत और चीन के बीच सहमति बनी है, उसमें यह सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है, क्योंकि कई दौर की कूटनीतिक एवं सैन्य स्तर की बातचीत इन दोनों की देशों के बीच हो चुकी है, मगर बातचीत में सहमति बनने के बावजूद कई बार चीन की ओर से अगले ही दिन उसका उल्लंघन कर दिया गया है, जिसके कारण नया विवाद खड़ा हो गया है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बैठक में इस बात का फैसला किया गया है कि पूर्व के समझौतों को वे न केवल ध्यान में रखेंगे, बल्कि उनका पूरा सम्मान भी करेंगे।

विशेष प्रतिनिधियों के जरिए भी बातचीत

India-China Relations को सुधारने के लिए विशेष प्रतिनिधियों के जरिए बातचीत सीमा से जुड़े मामलों पर जारी रखने के लिए इस बैठक में सहमति बनी है। इसका अर्थ यह हुआ कि दोनों देशों के बीच विवाद का निपटारा यदि सैन्य स्तर की बातचीत से नहीं हो पा रहा है तो ऐसे में एक विशेष प्रतिनिधि तंत्र को इन दोनों देशों के बीच विकसित किया जा सकता है, ताकि बातचीत के जरिए विवाद का हल निकाला जा सके। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया है कि बातचीत इस माध्यम से भी जारी रखी जाएगी।

LAC पर भरोसे का वातावरण

India-China Disputes एलएसी पर बिगड़े हालात का ही नतीजा है। LAC पर शांति बहाल करने के लिए दोनों देशों के बीच विश्वास कायम किया जाना बहुत ही जरूरी है। इससे जुड़े प्रयासों को तेज करना भी आवश्यक है। बैठक में यह चर्चा हुई कि कई बार मुद्दे सिर्फ इस वजह से और भी जटिल हो जाते हैं कि एक-दूसरे के प्रतिनिधियों पर दोनों ही देशों को भरोसा नहीं हो पाता है। ऐसे में भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच इस बात पर सहमति बनी है कि एक-दूसरे पर भरोसा बहाल करने की कोशिश दोनों ही देशों की ओर से पूरी तत्परता से की जाएगी।

निष्कर्ष

India-China Disputes के हल के लिए India-China five-point Action Plan पर सहमत तो हुए हैं, मगर इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि मॉस्को में ढाई घंटे तक चली इस मुलाकात के दौरान बनी यह सहमति तभी फलदाई साबित हो सकती है, जब कि चीन वास्तव में इसका सम्मान करे और पूरी गंभीरता से इस पर अमल भी करे। उम्मीद है कि ताजा प्रयासों से दोनों देशों के रिश्ते अब सुधर जाएंगे।

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