बाल दिवस – चाचा नेहरू का जन्मदिन

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अचकन में फूल लगाते , हमेशा ही मुसकाते थे,

बच्चों से प्यार जताते थे, चाचा नेहरू प्यारे थे।

किसी कवि की ये पंक्तियाँ स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री और युगसृष्टा श्री जवाहर लाल नेहरू के लिए कहीं गईं हैं। श्री नेहरू का जन्मदिवस 14 नवंबर के दिन पूरे भारत में बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। लेकिन इस उत्सव के इतिहास का ज्ञान अधिकतर लोगों को नहीं

बाल दिवस का आरंभ :

इतिहास के पृष्ठों में दर्ज है की बाल दिवस को मनाने की शुरुआत 1925 में भारत छोड़ो आंदोलन के नारे के साथ ही रखी गई थी। 1953 में इस उत्सव को वैश्विक मान्यता मिली। हालांकि संयुक्त राष्ट्र संघ ने बाल दिवस के रूप में 20 नवमबर अंतर्राष्ट्रीय रूप में दिन नियत किया था, जिसका पालन अनेक देश आज भी करते हैं। कुछ देशों में 20 जून जो बाल संरक्षण दिवस के रूप में सुरक्शित है, भी बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है।

चाचा नेहरू और बाल दिवस :

भारत में 1956 से श्री जवाहर लाल नेहरू को श्रद्धांजलि देने के लिए 14 नवंबर को बाल दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत करी गयी थी।

श्री जवाहर लाल नेहरू जिन्हें पूरा संसार एक सफल राजनैतिज्ञ, चिंतक और युग निर्माता के रूप में जानता है, वास्तव में हृदय से बाल प्रेमी थे। वो बच्चों को किसी भी देश के भविष्य के रूप में देखते थे। इसी सोच के आधार पर वो बच्चों के शारीरिक और मानसिक निर्माण पर बल देते थे जिससे एक स्वस्थ और शक्त  राष्ट्र का निर्माण हो सके। इस दिशा में ठोस कदम के रूप में उन्होनें अनेक शैक्क्ष्णीक और औध्योगिक शिक्षा संस्थानों की स्थापना करी थी।

चाचा नेहरू का जीवन :

14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद के एक सम्पन्न और विख्यात परिवार में जवाहर का जन्म हुआ। श्री मोतीलाल नेहरू और श्रीमति स्वरूप रानी के रूप में संस्कारी माता-पिता थे। अपना कॉलेज तक की शिक्षा इनहोनें लंदन से पूरी करी और 1912 में वकालत की डिग्री प्राप्त करके गांधी जी से प्रभावित होकर उसी वर्ष कांग्रेस से जुड़ गए। सक्रिय रूप से स्वाधीनता संग्राम में भाग लेते हुए, विभिन्न आंदोलनों में भाग लिया और जेल गए। 1947 में स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेकर इनहोनें इतिहास रच दिया। जर्जर और बीमार भारत को सुदृढ़ भारत में बदलने के लिए आधारभूत संरचना पर बल देकर औधोयोगीक विकास पर बल दिया। साथ ही विदेशी नीति को नया रूप देने के लिए पंचशील के सिद्धांतों को बढ़ावा दिया। 1954 में भारत रत्न से सम्मानित होकर मृत्यु पर्यंत प्रधानमंत्री के पद पर रहकर देश की सेवा करते रहे।

बच्चों के प्रति प्रेम और कोमल भावनाओं को देखते हुए ही लोगों ने उन्हें बच्चों का प्यारा चाचा का खिताब दिया और वे चाचा नेहरू बन गए।

कैसे मनता है बाल दिवस:

भारत में बाल दिवस एक उत्सव के रूप में मनाया जाता है। प्रमुख रूप से इस दिन सभी विध्यालयों में बाल मेलों का आयोजन होता है। जिसमें बच्चे अपनी विभिन्न कलाओं का प्रदर्शन करते हैं। इस दिन आयोजित होने वाली हर घटना का केंद्र बच्चे ही होते हैं।

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