चाणक्य: भारत के वो बड़े दार्शनिक, जिनकी नीतियों का अनुसरण पूरी दुनिया करती है

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जो शक्ति ना होते हुए भी मन से हार नहीं मानता है,

उसे दुनिया की कोई भी ताकत परास्त नहीं कर सकती है।

आचार्य चाणक्य की ऐसी ना जाने कितनी पंक्तियां हैं, जिनका अनुसरण पूरे विश्व में किया जाता है। आचार्य चाणक्य हमारे राष्ट्र की सबसे बड़ी विरासतों में से एक हैं। आचार्य चाणक्य को एक महान दार्शनिक, राजनितिक मार्गदर्शक, अर्थशास्त्री, सलाहकार और शिक्षक के रुप में देखा जाता है। उन्होंने सुखी और श्रेष्ठ जीवन के लिए कई नीतियां बताई हैं। आज भी यदि इन नीतियों का पालन किया जाए तो हम कई परेशानियों से बच सकते हैं।

चाणक्य: दार्शनिक और मार्गदर्शक

आचार्य चाणक्य चंद्रगुप्त मौर्य के शाही सलाहकार थे, उन्हें एक युवा राजकुमार को शक्तिशाली सम्राट बनाने का भी श्रेय दिया जाता है। चंद्र गुप्त मौर्या के प्रतिभाशाली शासन और महान राजा बनने के पीछे चाणक्य का बहुत बड़ा हाथ था। परंपरागत रूप से उन्हें कौटिल्य या विष्णुगुप्त के रूप में भी पहचाना जाता है। आचार्य चाणक्य ने शुरुआत में तक्षशिला विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र पढ़या। हालांकि जल्द ही वो एक मगध के राजकुमार के शाही सलाहकार भी बन गए। उन्होंने चंद्रगुप्त मौर्य को राजनीतिक-रणनीतिक कौशल के साथ तैयार किया ताकि वो विशाल मौर्य साम्राज्य पर शासन कर सकें। चाणक्य के बताए रास्ते पर चलने का परिणाम ये हुआ कि मौर्य  साम्राज्य भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी हिस्से से दूर-पूर्वी और दक्षिणी भाग तक फैल गया।

चाणक्य: अर्थशास्त्र के लेखक

चाणक्य का असली नाम विष्णु गुप्त था, जिसे कौटिल्य भी कहा जाता था। उनके द्वारा रचित अर्थशास्त्र राजनीति, अर्थनीति, कृषि, समाजनीति आदि का महान ग्रंन्थ है। अर्थशास्त्र मौर्यकालीन भारतीय समाज का दर्पण माना जाता है। चाणक्य शायद भारत में अर्थशास्त्र के अग्रणी लेखक रहे हैं। विष्णुपुराण, भागवत आदि पुराणों तथा कथासरित्सागर आदि संस्कृत ग्रंथों में तो चाणक्य का नाम आया ही है, बौद्ध ग्रंथो में भी इसकी कथा बराबर मिलती है।

चाणक्य: बदले की भावना

चाणक्य की जन्मतिथि और जन्मस्थान हमेशा से ही विवाद का विषय रहे हैं, इन्हें लेकर विद्वानों में अबतक सहमति नहीं बन पाई है। लेकिन चाणक्य को लेकर कुछ कथाएं ऐसी भी हैं, जिनके होने पर कोई भ्रम नहीं है। कहा जाता है कि पाटलिपुत्र के राजा नंद यहां यज्ञ था। उसमें चाणक्य भी गए और भोजन के समय एक प्रधान आसन पर जा बैठे। महाराज नंद ने इनका काला रंग देख इन्हें आसन पर से उठवा दिया। इसपर क्रुद्ध होकर इन्होंने यह प्रतिज्ञा की कि जबतक मैं नंदों का नाश न कर लूंगा तबतक अपनी शिखा न बांधूंगा। उन्हीं दिनों राजकुमार चंद्रगुप्त राज्य से निकाले गए थे। चद्रगुप्त ने चाणक्य से मेल किया और दोनों ने मिलकर म्लेच्छ राजा पर्वतक की सेना लेकर पाटलिपुत्र पर चढ़ाई की और नंदों को युद्ध में परास्त करके मार डाला। नंदों के नाश के संबंध में भी कई प्रकार की कथाएं प्रचलित हैं।

चाणक्य नीति

आचार्य चाणक्य की नीतियों का अद्भुत संग्रह है, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना वह दो हजार चार सौ साल पहले था, जब इसे लिखा गया था । चाणक्य नीति में पूरे 17 अध्याय हैं। इसमें मित्र-भेद से लेकर दुश्मन की पहचान, पति-परायण और चरित्र हीन स्त्रियों की पहचान, राजा का कर्तव्य और जनता के अधिकारों तथा वर्ण व्यवस्था का उचित निदान और सुखी जीवन की सभी नीतियां बताई गई है। साम, दाम, दंड, भेद जैसे प्रसिद्ध सिद्धांतों का वर्णन भी चाणक्य ने ही किया है। चाणक्य की कूटनीति और उनके सिद्धांतों के बारे में कई पुस्तकें लिखी गयी है।

आचार्य चाणक्य के गौरवशाली व्यक्तित्व के बारे में पढ़ने से नई ऊर्जा का संचार होता है। कौटिल्य के विचार आज भी प्रेरणादायी हैं।

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