अध्यापक बनने के इच्छुक दें शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET)

58

भारतीय संस्कृति में वैदिक काल से ही गुरु को ईश्वर से ऊंचा स्थान दिया गया है। प्राचीन काल में गुरुकुल परंपरा के अंतर्गत गुरु अपने शिष्यों को अध्यात्म, संगीत, युद्ध कला से लेकर जीवन के हर क्षेत्र का ज्ञान प्रदान करते थे। 1850 तक चली इस शिक्षा व्यवस्था का अंत ब्रिटिश अधिकारी मैकाले ने किया और शिक्षा पद्धति में क्रांतिकारी परिवर्तन कर दिये। परिवर्तन की यह हवा आधुनिक काल तक निरंतर चली आ रही है। इसका नवीनतम प्रारूप शिक्षक पात्रता परीक्षा के रूप में दिखाई देता है। वर्तमान समय में यदि कोई व्यक्ति शिक्षक बनना चाहता है तो उसे अपनी योग्यता एक परीक्षा के माध्यम से सिद्ध करनी होती है।

शिक्षक पात्रता परीक्षा:

वर्ष 2011 से भारत सरकार ने अध्यापन के क्षेत्र का स्तर में सुधार करने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा के आयोजन करने का निर्णय लिया। इसके बाद भारत में शिक्षक बनने के इच्छुक युवा को नेशनल काउंसिल फॉर टीचर्स एजुकेशन द्वारा आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा देनी अनिवार्य है। इस परीक्षा के माध्यम से युवाओं की अध्यापन के क्षेत्र में अभिरुचि और विभिन्न विषयों के अध्यापन की कला-कौशल को जांचा जाता है।

टीईटी का आयोजन :

शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन केंद्र सरकार और राज्य सरकारों द्वारा अलग-अलग किया जाता है। केंद्र सरकार द्वारा ली जाने वाली परीक्षा “केन्द्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा ” होती है। इसका आयोजन केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, नई दिल्ली, के द्वारा होता है। इसके अतिरिक्त आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब द्वारा अपने राज्यों के लिए इस परीक्षा का आयोजन किया जाता है। प्रत्येक राज्य का शिक्षा विभाग अपने-अपने राज्य में इस परीक्षा के आयोजन के लिए उत्तरदायी होते हैं।

टीईटी  परीक्षा के लिए योग्यता :

वह भारतीय युवा जिसने अध्यापन संबंधी कोई पाठ्यक्रम जैसे प्राथमिक शिक्षा में डिप्लोमा, अध्यापन में स्नातक या स्नातकोत्तर किया है, वो इस परीक्षा को देने के योग्य माने जाते हैं।

 टीईटी  परीक्षा पाठ्यक्रम:

शिक्षक पात्रता परीक्षा पाठ्यक्रम, राष्ट्रीय पाठ्यक्रम तंत्र पर आधारित होता है।

टीईटी  परीक्षा का प्रारूप:

अध्यापक बनने के इच्छुक युवा टीईटी  परीक्षा  को दो भागों में देते हैं। पहला भाग कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों के अध्यापन के लिए और दूसरा भाग कक्षा 6 से 8 के छात्र अध्यापन के लिए होता है। जो परीक्षार्थी दोनों कक्षाओं को पढ़ाने में रुचि रखते हैं उन्हें दोनों भागों की परीक्षा देनी होती है। यह पूरी परीक्षा 150 प्रश्नों की होती है जिसे 150 मिनट में पूरा करना होता है । परीक्षार्थी युवा को इस परीक्षा को न्यूनतम 60% अंको से उत्तीर्ण करना अनिवार्य होता है। इसके बाद उसके सामने सरकारी और निजी स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों के अध्यापन के अवसर खुल जाते हैं।

टीईटी  की तैयारी कैसे करें:

किसी भी अन्य परीक्षा की भांति इस परीक्षा के लिए आप निम्न तरीकों को अपना सकते हैं:

  1. परीक्षा देने से पूर्व उसके पाठ्यक्रम की पूरी जानकारी प्राप्त कर लें। उसे अच्छी तरह से समझ कर ही अपनी तैयारी करें।
  2. परीक्षा की तैयारी करने से पूर्व स्वयं को तनावमुक्त रखें।
  3. परीक्षा के पाठ्यक्रम के आधार पर एक रणनीति तैयार करें।
  4. परीक्षा की नियत तिथि से पूर्व अपने स्तर पर मौक टेस्ट लें जिससे आप अपनी तैयारी का स्तर जांच सकते हैं।
  5. समय सीमा को ध्यान में रखते हुए अधिकतम प्रश्नों को हल करने का प्रयास करें।

 

Comments